मोगा 16 (मुनीश जिन्दल)
28 फरवरी को होने वाले जिला बार एसोसिएशन के चुनाव, इस बार दिलचस्प रहने वाले हैं। प्रधान पद के लिए त्रिकोणीय मुकाबला है। प्रधान पद के तीनों ही दावेदार वकील, अपने अपने स्तर पर अपने साथी वकीलों/ वोटरों को उनके हक में वोट डालने के लिए लुभा रहे हैं। इस मौके पर प्रधान पद्द के तीनों ही दावेदारों ने “मोगा टुडे न्यूज़” की टीम से ख़ास बातचीत की। आइए आप भी जानें, कि किस प्रकार तीनों ही उम्मीदवारों ने अपनी अपनी दावेदारी पेश की।


एडवोकेट हरदीप सिंह लोधी, वर्ष 1999 से जिला बार में प्रैक्टिस कर रहे हैं। इसके अलावा वे एक बार प्रधान, एक बार सहसचिव व एक बार लाइब्रेरी इंचार्ज के पद्द पर काम कर चुके हैं। एडवोकेट लोधी का मानना है कि, उन्होंने अपनी पहली प्रधानगी के समय में भी जिला बार के चहुमुखी विकास के लिए अनेक काम किए। जैसे परिसर में इंटरलॉकिंग टाईल लगवाना, बार में वाई फाई की सुविधा लाना, बार को सीसीटीवी कैमरों से लैस करवाना, लाइब्रेरी में डायरेक्टरी सिस्टम शुरू करवाने के साथ साथ, बार का नवीकरण भी उन्हीं के कार्यकाल में हुआ था। इसके इलावा उनका मानना है कि वकीलों की, व बार की, गरिमा बनाए रखने के लिए उनका प्रधान बनना, वकीलों के हित्त में है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि अगर उनके साथी वकील, उन्हें दोबारा मौका देते हैं, तो वे जहां बार में चल रही महिला वकीलों की समस्याओं को पहल के आधार पर हल करेंगे, वहीं वे नए वकीलों को पेश आ रही चैंबर की परेशानी को भी दूर करेंगे। इसके इलावा वे वकीलों की गरिमा को बनाये रखने में भी अपनी अहम भूमिका निभाएंगे। कुल मिलाकर उन्होंने कहा कि वे वकीलों के कल्याण के लिए व किसी भी मुश्किल की घड़ी में अपने साथियों के लिए 24 X 7 उपलब्ध रहेंगे।


48 वर्षीय एडवोकेट सुखविंदर सिंह सिद्धू, 2010 से जिला बार में प्रैक्टिस कर रहे हैं। व इससे पूर्व वे दो बार सचिव व दो बार वित्तीय सचिव रह चुके हैं। उन्होंने कहा कि प्र्तेक वर्ष बड़ी संख्या में नए युवा वकील बार से जुड़ते हैं। उनका मानना है कि वे बेहतर तरीके से युवा वकील वर्ग का नेतृत्व करने में सक्षम हैं। जिसके चलते वे वकीलों के चैंबर की समस्या को हल करवाएंगे। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि कुछ न्यायाधीश, नए वकीलों को तरजीह नहीं देते। लेकिन वे पेशेवर तरीके से वकीलों की गरिमा को कायम रखते हुए न्यायधीशों व नए वकीलों में सहयोग की कड़ी का काम करेंगे। उन्होंने कहा कि अगर उनके साथी, उन्हें प्रधान बनने का मौका देते हैं, वे वकीलों के मान सम्मान का खास ध्यान रखेंगे।


2013 से प्रैक्टिस कर रहे एडवोकेट हरदीप सिंह सेतिया, इससे पूर्व दो बार उप प्रधान का चुनाव लड़े हैं। हालांकि दोनों बार उन्हें हार का सामना करना पड़ा। लेकिन फिर भी वकील साथियों की गरिमा बरकरार रखने के लिए, उनके मन में अनेक चीजें हैं। उन्होंने कहा कि कुछ न्यायधीश वकीलों की बेस्ती करने से नहीं चूकते हैं। लेकिन वे वकीलों की इस गरिमा को कायम रखेंगे। उन्होंने कहा कि वे बिना किसी से भेदभाव किए, बिना चापलूसी के कार्य करेंगे। उन्होंने कहा कि वे किसी के नाम पर कोई रु लेने में भी विशवास नहीं रखते हैं। उन्होंने कहा कि अगर किसी वकील पर कोई वित्तीय संकट भी आता है, तो वे ऐसी व्यवस्था चाहते हैं, कि समूचा वकील भाईचारा मिलकर उस वकील की सहयता करे। उन्होंने कहा कि, कुल मिलाकर वे न्यायाधीश व वकीलों में बेहतर ताल मेल का प्रयास करेंगे।

