
मोगा 15 नवंबर, (मुनीश जिन्दल)
GST विभाग में गलत दस्तावेजों के आधार पर जीएसटी नंबर जारी किए जा रहे हैं। इस बात का खुलासा तब हुआ जब GST विभाग द्वारा पंजाब के जिला मोगा के एक दिहाड़ीदार मजदूर को 35 करोड़ से अधिक रु जमा करवाने का एक नोटिस आया। एकत्रित जानकारी के मुताबिक़ कोरोना काल के दौरान पीड़ित व्यक्ति को सहायता देने के नाम पर कुछ लोग उससे उसके कागजात आधार कार्ड इतियादी ले गए थे।जिसके बाद उसे सहायता तो नहीं आई, लेकिन उस वक्त उसके पैरों तले जमीन जरूर खिसक गई जब GST विभाग लुधियाना 1 की और से दिहाड़ीदार मजदूर को 35 करोड़ की राशि देने को कहा गया। फिलहाल पीड़ित परिवार की रातों की नींद हराम है, और कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए वे लोग मोहल्ले के पार्षद सहित अन्य मोहतवार लोगों से सम्पर्क कर सहायता व इंसाफ की गुहार लगा रहा है।
यहां जिक्रयोग्य है कि GST नंबर लेने वाले व्यक्ति को एक लम्बी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। इस संबंधी जब GST व आयकर के वकील वरिंदर अरोड़ा से सम्पर्क किया गया, तो वरिंदर अरोड़ा ने बताया कि GST नंबर लेने वाले व्यक्ति को GST विभाग को अपने काम वाली जगह की बाहर की व अंदर की फर्म के नाम वाले बैनर के साथ अपनी तस्वीरें गूगल मैप्स से खींचकर लोकेशन व समय के साथ भेजनी होती हैं। इसके साथ ही ये सारी प्रक्रिया आधार कार्ड के OTP के माध्यम से प्रमाणित होती है। इसके इलावा वो जगह जिस पर GST नंबर लेने वाले व्यक्ति ने काम करना है, अगर वो जगह उसकी अपनी है, तो उसकी रजिस्ट्री की कॉपी आपको अपने आवेदन के साथ लगानी होती है, लेकिन अगर आपकी जगह किराए की है, तो किराएनामे की कॉपी आपके आवेदन के साथ लगती है। CA वरिंदर अरोड़ा ने बताया कि आपका आवेदन अप्लाई होने के बाद सैंटर को जाता है या आपके संबंधित राज्य को, ये सिस्टम की मर्जी होती है, जिसके बाद आपके आवेदन की पूर्ण जांच के बाद विभाग आपको GST नंबर आवंटित करता है।

“मोगा टुडे न्यूज़” की टीम से पीड़ित अजमेर सिंह सहित वार्ड के पार्षद जगजीत सिंह उर्फ़ जीत ने बातचीत की।
AJMER SINGH (VICTIM)
JAGJIT SINGH JEET (MC)
हो सकता है आने वाले दिनों में पुलिस उक्त जालसाज लोगों के खिलाफ मामला दर्ज करले, लेकिन इस मामले ने इस बात का खुलासा जरूर किया है कि GST विभाग में गलत दस्तावेजों के आधार पर मिलीभगत से GST नंबर बेख़ौफ़ जारी हो रहे हैं। जिसके चलते, किसी की करनी, किसी और को भरनी पड़ती है।

