

मोगा 7 अक्टूबर (मुनीश जिन्दल)
लोगों को अपने कामों के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाते आमतौर पर देखा जाता है, लेकिन अगर हम आपको कहें कि गल्ती सरकारी विभाग की है, लेकिन चक्कर पीड़ित व्यक्ति काट रहा है, तो शायद सुनने में आपको यह अजीब लगेगा। लेकिन जो मामला, आज हम आपके सामने लेकर आए हैं, वह वर्ष 2008 में डीटीओ कार्यालय द्वारा की गई जालसाजी का है, जिसकी सजा आज तक एक वकील को भुगतनी पड़ रही है। क्या है पूरा मामला इसके लिए आपको ले चलते हैं जिले की सबडिवीजन धर्मकोट के गांव जलालाबाद के वकील इंद्रप्रीत सिंह के पास :
विभाग द्वारा न केवल RTI एक्ट को अनदेखा किया गया, अपितु उसके बाद अदालती आदेशों की भी धज्जियाँ उड़ाई गई।
पीड़ित वकील इंदरप्रीत सिंह ने बताया कि किस प्रकार DTO कार्यालय के कुछ जालसाजों ने उनके पिता की निशानी, उनके स्कूटर के फैंसी नंबर को उनके पिता की मृत्यु के 6 वर्ष बाद जाली दस्तावेज तैयार कर उसका नंबर एक BMW कार को लगा दिया।

पीड़ित वकील इंदरप्रीत सिंह ने कहा कि अगर समय रहते पुलिस BMW कार को ‘एमपॉन्ड’ कर कार्यवाई कर देती, तो 2008 से लेकर आज तक उन्हें पुलिस थानों सहित अदालत के धक्के ना खाने पड़ते। उन्होंने बताया कि पुलिस थाने के बार बार चक्कर लगाने के बावजूद भी पुलिस की भूमिका इस सारे मामले में शून्य ही रही।
जिसके पश्चात आखिरकार वर्ष 2023 में पीड़ित को माननीय अदालत का दरवाजा खट खटाना पड़ा, जिसके बाद अब अदालत द्वारा इस मामले में कुल 4 लोगों को सम्मन भेजे गए हैं। कौन हैं ये लोग, इस संबंधी पीड़ित वकील इंदरप्रीत ने ‘मोगा टुडे न्यूज़’ से जानकारी साझा की।

